सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में
समर्पित भारत सरकार का उपक्रम है। NRLC की स्थापना
1976 में हुई। अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए NRLC
महत्वपूर्ण अनुसंधान, संरक्षण के उपाय, संरक्षण की
संपूर्ण आरोग्यकारी संरक्षण में प्रशिक्षण और बचाव के
क्षेत्र में अनेक कार्यक्रम लागू करता है। चुनिंदा
आधारों पर NRLC संरक्षण सुसविधायें भी प्रदान करता है।
NRLC ने विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण
सांस्कृतिक विरासत के विश्लेषणात्मक अध्ययन के लिए
अनेक तरीके एवं मानक विकसित किये है। NRLC ने दीवार
चित्रों एवं एक नर श्रवाल इमारत को मिलाकर सहस्त्रों
प्रजातियों पर प्रयोग किये है। NRLC ने दक्षिण एवं
दक्षिण पूर्व एशिया के प्रतिभागियों के लिए रोगनाशक
संरक्षण पर अनेक कार्यशालायें एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम
आयोजित किये है। NRLC में ICCROM द्वारा श्रवाल चित्र
इमारत के संरक्षण का प्रशिक्षण भी चलाया।
अपने निर्माणात्मक चरणों में NRLC UNDP एवं UNESCO (जो
कि इस समय ICCROM का सहायक सदस्य है।) के प्रारम्भिक,
मैलिक एवं तकनीकि सहयोग से विकसित किया गया था। उस
प्रयोगशाला के उद्देश्य एवं ध्येय निम्नवत् है -
संरक्षण के बेहतर तरीकों के विकास के लिए अनुसंधान
पुरातत्व एवं कलात्मक तत्वों का तकनीकि अध्ययन
पुरातत्व विभागों, अजायक घरों एवं अन्य संस्थानों का
तकनीकि सहयोग
प्रशिक्षण, लेखा-जोखा, प्रकाशन एवं अंतर्राष्ट्रीय संधि
इत्यादि ध्येय के प्रति समर्पित चरित्र।
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